Saturday, February 20, 2010

देश की असली तस्वीर

इंडिया तरक्की कर रहा हैं .....लेकिन ये तस्वीर काफी हैं भारत की सचाई बताने के लिए.... भले ही हम तरक्की के नए मुकाम हासिल कर रहे हो लेकिन ....कडवी सचाई ये हैं की आज भी हमारे देश में गरीबी का बोल बाला हैं......गरीबी हर घर में राज कर रही हैं....जहाँ में एक सवाल कौध रहा होगा की कैसे ......हर रोज़ घरों में कामकरते मासूम बच्चे क्या गरीबी का गुलाम नहीं है.....सडकों पर कबाड़ा बीनते बच्चे क्या गरीबी की गुलामी नही कर रहे है.....कभी गौर से देखा है सड़को पर भीख मांगते बच्चे.....कैसे रेड लाइट पर दौड़ दौड कर भीख मांगते है......हर गाड़ी के पास जाते वक्त उन्हे एक उम्मीद होती है कि गाडी का शीशा उतरेगा और कोई नौजवान या फिर मेम सहाब उसके हाथ में एक या दो रूपए थमा देगी,,,,,,लेकिन मिलता क्या है ......झिडकी.....वो भी कुछ इस अंदाज में--- अबे खुले पैसे नही है .....सडकों पर कचरा बीनकर गुजरा करने वाले होटलों में कप साफ करने वाले मासूम बच्चे गरीबी की गुलामी ही तो कर रहे है......लेकिन इन्हे गुलाम बनाने वाले कोई और नही हमारे देश के वो लोग है जो अपने आप को भारत का मसीहा समझते हैं....आज तक कोई भी हमारे देश के मर्ज को नही समझ पाया कि गरीबी बाल मज़दूरी की जड़ है .....या बाल मजदूरी देश के लिए एक अलग बिमारी है...... हक़ीकत तो ये है कि गरीबी ही बाल मजदूरी की एक बड़ी समस्या है....... गरीबी के चलते ही छोटे छोटे मासूम बच्चे बाल मजदूरी करने के लिए मज़बूर होते है अगर ऐसा नही करेंगे तो खाना कहा से खाएंगे......फिर चोरी करेंगे औऱ जेल जाएंगे......सरकार बाल मंजदूरी पर कानून बनाती है कहती है बाल मजदूरी ग़ैर कानूनी है-----लेकिन अगर ये बच्चे अपना पेट नही भरेंगे तो इनका गुजारा कैसे होगा ......सरकार बाल मजदूरी पर रोक की बात तो करती है लेकिन बच्चों के उथ्थान के लिए कोई कदम तो उठाए.....

वंदना त्यागी
चैनल वन

Saturday, January 9, 2010

महंगाई


कमर तोडती महंगाई ने आम आदमी से लेकर खास सभी का जीना मुहाल कर दिया हैं ...ऐसे में डेल्ही की मुख्य मंत्री का बयान की आने वाले कई महीनो तक ना तो चीनी के दाम कम होंगे और ना ही डेल्ही की सडको पर दोड़ते वाहनों पर संख्या पर....... ऐसे में दिल्ली में रहने वाले लोगों के लिए बुरी खबर हो सकती हैं...... इसे सरकार की नाकामी कहा जायेगा या दिल्ली में चीनी की कमी .... लेकिन देखा जाय तो ना सिर्फ चीनी बल्कि खाने पीने की तमाम चीजे इतनी महंगी हो चुकी हैं की बजट में समाना न मुमकिन हो गया हैं ..... यहाँ सवाल ये उठता हैं की गरीब आदमी करे तो क्या करे

vandana

Friday, December 11, 2009

मेरे देश की तश्वीर तुझे क्या हो गया हैं ......क्या करे देश सारा कांग्रेस में हो गया हैं..... क्या करे भीख मांगकर होता तो हैं गुजरा..... नोकरी पेशा लोगों का तो गुजारा ही मुहाल हो गया है मेरे देश की तश्वीर तुझे क्या हो गया हैं।

Wednesday, December 2, 2009

शादी के मेरी लाइफ का बदलाव

मेरी love marriage हुई थी॥ हम दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे । जब हम बी स सी सेकंड इयर में थे तब विनीत जो मेरे हसबैंड बन गये हैं उनका आर्मी में नमब़र आ गया वो आपनी ट्रेनिंग पर चले गये ....करीब सात साल बात मार्च १२ ,२००९ को हमारी शादी हो गई ...... में अपने पति से खुश हूँ.... कुछ महीनो बाद में माँ भी बन जाउंगी ..... लेकिन न जाने दिल के किसी कोने में आपने माँ पापा का प्यार विनीत के प्यार पर भरी पड़ता दीखता हैं... एक वक्त था जब में विनीत से जयादा किसी से भी प्यार नही करती थी .लेकिन जब से पापा ने मेरी शादी खुशी खुशी विनीत से कर दी तब से मेरे दिल में पापा की जगह और जायदा बन गयी हैं........ अब जब में अकेली हूति हूँ तो मुझे विनीत का प्यार याद नही आता बल्कि पापा को वो दुलार याद आता हैं जो उन्होंने मुझे दिया... मेरा मन पापा माँ से मिलने का करता रहता हैं लेकिन वहा जाने के लिए भी विनीत से पर पूछना तो पड़ता ही हैं.....विनीत मना तो नही करता लेकिन मुझे ऐसा लगता हैं की वो दिल से ये चाहता हैं की में ससुराल जाऊँ..... लेकिन मेरा मन वहां जाने का नही करता हैं..... मुझे नही पता क्यो, लेकिन में आपनी पुराणी जिन्दगी में लोटना जरुर चाहती हूँ ...लेकिन अब से सम्भव नही हैं

वंदना के दिल का दर्द

Monday, November 2, 2009

कई बार जिन्दगी हमे कितना उदाश कर देती है हम आपनो से ही कितने खफा हो जाते है । वो आपने जिनके बारे में हम सोचते हैं की वो हमारे सबसे करीब है और उनकी जगह हमारी लाइफ में कोई नही ले सकता । बावजूद इसके न चाहते हुए भी आपनो से दर्द आसानी से मिल जाता है । हालाकि लोग आपना ब्लॉग न जाने क्या सोच कर बनते होंगे लेकिन मेरी कलम जब भी उठती है वो या तो ऑफिस में स्क्रिप्ट के लिए या जब में दुखी होती हूँ तो आपने दर्द को बायाँ करने के लिए --------कहते हैं की पति पत्नी का रिश्ता विश्वास और प्यार पर टिका होता हैं । लेकिन कई बार प्यार और विश्वाश भी रखा रह जाता हैं

Saturday, July 18, 2009

मेरी लव स्टोरी का अगला हिस्सा

अब से पहले मेने लिखा था की मेरे सपने में फिर एक लड़का आए। ये लड़का वही था जिसने मेरे बैग में लैटर रखा था। में सोचने लगी सपने में तो उसी लड़के ने बैग में लैटर रखा जो क्लास में दिखा कही सच में भी उसी ने ही तो ये लैटर नही रखा हैं। ख़ैर कशमकश का ये सिलसिला कुछ दिनों तक चलता रहा। वो लड़का कोनहैं ये जान ने की तड़फ दिन बे दिन बढ़ने लगी। वो मेरे पीछे बैठकर कुछ्ना कुछ बोलता और मुझे लगता ये आवाज जानी पहचानी क्यो लगती है में ये सोचकर ही रह जाती .आखिर में वो दिन आ ही गया जब मेरा आमना सामना उस अजनबी से हो ही गया। वो आपने दोस्त से बातें कर रहा था । और में उसके सामने से गुजर गयी मेने देखा ये वही लड़का हैं जोआवाज मुझे जानी पहचानी लगती थी। मेने जब उसे पहली बार गौर से देखा तो मुझे भी लगा जैसे मेने उसे पहले भी देखा हैं । सरे इंसिडेंट के बारे में सोचकर मुझे लगा की हमारा कोई पुराना रिश्ता हैं और भगवान् हमे मिलाना चाहता हैं। बस यही से में उसे सीरियसली लेने लगी । में उसकी हर बात पर धयान रखने लगी । वो जो कुछ भी बोलता मेरे लिए प्यार भरी छेड़खानी होती। मेरा शक यकीन में बदलने लगा । मुझे लगने लगा की वो मुझे प्यार करता हैं। में भी उसे चोरी चोरी देखती थी और वो भी लेकिन दोनों के दिल में क्या चल रहा था । ये दोनों में से कोई नही जनता था। आगे फ़िर कभी --------------------------