भले ही हम तरक्की के नए मुकाम हासिल कर रहे हो लेकिन ....कडवी सचाई ये हैं की आज भी हमारे देश में गरीबी का बोल बाला हैं......गरीबी हर घर में राज कर रही हैं....जहाँ में एक सवाल कौध रहा होगा की कैसे ......हर रोज़ घरों में कामकरते मासूम बच्चे क्या गरीबी का गुलाम नहीं है.....सडकों पर कबाड़ा बीनते बच्चे क्या गरीबी की गुलामी नही कर रहे है.....कभी गौर से देखा है सड़को पर भीख मांगते बच्चे.....कैसे रेड लाइट पर दौड़ दौड कर भीख मांगते है......हर गाड़ी के पास जाते वक्त उन्हे एक उम्मीद होती है कि गाडी का शीशा उतरेगा और कोई नौजवान या फिर मेम सहाब उसके हाथ में एक या दो रूपए थमा देगी,,,,,,लेकिन मिलता क्या है ......झिडकी.....वो भी कुछ इस अंदाज में--- अबे खुले पैसे नही है .....सडकों पर कचरा बीनकर गुजरा करने वाले होटलों में कप साफ करने वाले मासूम बच्चे गरीबी की गुलामी ही तो कर रहे है......लेकिन इन्हे गुलाम बनाने वाले कोई और नही हमारे देश के वो लोग है जो अपने आप को भारत का मसीहा समझते हैं....आज तक कोई भी हमारे देश के मर्ज को नही समझ पाया कि गरीबी बाल मज़दूरी की जड़ है .....या बाल मजदूरी देश के लिए एक अलग बिमारी है...... हक़ीकत तो ये है कि गरीबी ही बाल मजदूरी की एक बड़ी समस्या है....... गरीबी के चलते ही छोटे छोटे मासूम बच्चे बाल मजदूरी करने के लिए मज़बूर होते है अगर ऐसा नही करेंगे तो खाना कहा से खाएंगे......फिर चोरी करेंगे औऱ जेल जाएंगे......सरकार बाल मंजदूरी पर कानून बनाती है कहती है बाल मजदूरी ग़ैर कानूनी है-----लेकिन अगर ये बच्चे अपना पेट नही भरेंगे तो इनका गुजारा कैसे होगा ......सरकार बाल मजदूरी पर रोक की बात तो करती है लेकिन बच्चों के उथ्थान के लिए कोई कदम तो उठाए.....वंदना त्यागी
चैनल वन
uf! narayan narayan
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