Thursday, January 5, 2012

होकी का जादू

हमारा राष्ट्रीय खेल होकी धीरे धीरे आपनी पहचान खोता जा रहा हैं..इस खेल की शुरुआत १९ वीं शताब्दी में हुई थी....और होकी का पहला इंटर नेशनल होकी मैच इंग्लेंड और आयरलैंड के बीच1985 में खेला गया । हलाकि इस खेल को अंग्रेज इंडिया में लेकर आये थे...लेकिन इस खेल को अलग पहचान इंडियन ने दिलवाई उस ज़माने में ये खेल आर्मी मैनखेलते थे। होकी के जादूगरओलम्पिक मेज़र धयांचन ने तीन बार होकी को गोल्ड मेडल दिलवाया ।

Thursday, September 22, 2011

यूपीए सरकार पी चिदबरम पर मेहरबान हो गई है तभी तो ये पता चल जाने के बाद भी, की 2 जी स्पेक्ट्रम का, सस्ती दर में आवंटन कराने के पक्ष चिदंबरम थे, सरकार उन्हे बचाने पर अड़ी है... देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस बात की सूचना बित्तमंत्रालय ने इस साल मार्च में एक नोट के जरिए दी थी। इस बात की खुलासा होने के बाद विपक्ष को एक बार फिर सरकार को घेरने का मौका मिला है....हर बार की तरह विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे को हवा देने लगी है...वाम दल जहां पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रही है वही बीजेपी गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की मंजूरी से पीएमओ को भेजे गए वित्त मंत्राल. के नोट के सार्वजनिक होने के बाद 2 जी आंच में अब गृह मंत्री पी चिदंबरम को भी तपाने लगी है...लेकिन कांग्रेस पूरी तरह से उनके बचाव में मुस्तैद दिख रही है....कांग्रेस ने उनके खिलाफ किसी तरह की जांच को खारिज़ कर दिया है। सरकार का साफ कहना है कि हमे चिदंबरम पर पूरा भरोसा है।

Monday, August 29, 2011

रिश्तों पर पड़ती वक्त की गर्त


कई बार रिश्तों में अजीब से कड़वाहट पैदा हो जाती है....क्यू होता है ऐसा शायद इसका जवाब तलाशने के लिए हम इधर अधर जाने की जरूरत नहीं है.....सभी सवालों के जवाब हमे अपने अंदर मिल जाएंगे..... अक्सर लोग प्यार की तलाश में प्रेम विवाह करते है........आज तो शख्स हमे दुनिया का सबसे संजीदा व्यक्ति लगता है अचानक उस शख्स से कटने क्यों लगते है.....जब तक वो ज़िंदगी का हिस्सा नहीं बनता...उसे पाने की ललक हमे दुनियां से दूर कर देती है ...लेकिन जब वो शख्स जिंदगी की गाड़ी का दुसरा पहियां बन जाता है तो हम उससे दुरियां बनाने लगते है...एक वक्त वो होता है जब हमे उससे बात किए बिना नींद नही आती है और फिर एक दिन वो आ जाता है कि हम उससे बात करके नींद नहीं आती॥दोनों ही बातों में बहुंत थोड़ा सा अंतर है लेकिन कितना फांसला है ये बखुबी बयां हो रहा है..... मेरे लिए ये आर्टिकल नहीं है....मेरे दिल की भावना है....आज में कुछ ऐसे ही सवालों से जूझ रही हूं.....जिनके जवाबों को तलाशने के लिए मैं ये सब लिख रहीं हूं......मैने महसूस किया है कि अब मैं किसी से बात करके उतनी खुशी महसूस नहीं करती हूं जितनी कभी करती थी....मन करता है शांत रहूं......शादी करने के बाद अब मुझे लगता है कि मैने बहुत बड़ी ग़लती की है.....मुझे उस शख्स से उतनी शिकायत नहीं है जिससे मैने शादी की है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि मुझे उससे शिकायत नहीं है लेकिन कहीं ना कही मेरा मन बैचेन है.....पता नहीं क्यू लाईफ में एक खाली पन है...... जब भी अपने लाइफ पाटनर से बात करती हूं मुझे सुकून नहीं मिलता॥जब भी बाते करती हूं तो ऐसा लगता है कि हमारी बातों से प्यार कहीं छू मंतर हो गया है.......हम दोनों ऐसे बाते करते है जैसे हमारे पास कोई बात ही ना हो......मुझे वजह पता है.....पिछले कुछ दिनों में मेरे साथ जो घटनाए हुई उन्होने मुझे सबसे काट दिया है.....मेरा अब किसी से बात करने का मन नहीं करता.....ऐसा लगता है कि कोई मेरी फिलिंग नहीं समझता है....मेरे लाइफ पाटनर की बाते भी मेरे दिल के खालीपन को भर नहीं पाता है.....पता नहीं मै ये सब कुछ क्यों लिख रही हूं......लेकिन आज के वक्त में हम अपनी बातों को किसी के साथ शेयर करे तो कोई हल थोड़े ही निकलता है....इससे अच्छा तो ये है कि अपनी भावनाओँ को कलम के जरिए किसी पन्ने पर तराशा जाए....

Tuesday, January 18, 2011

दिल वालों की नहीं बलात्कारारियों की बनी दिल्ली

दिल वालों की नहीं बलात्कारारियों की बनी दिल्ली

हम किसी से कम नहीं... दिल्ली है दिल वालों की...इतना ही नही कॉमनवेल्थ गेमस के बाद तो ये भी कहा जाने लगा है कि दिल्ली वर्ल्ड क्लाश सिटी बन गई है......लेकिन किस मामले में..... विकास के तौर पर या पतन के रूप में.....दिल्ली के बिगड़े हालातों को देखकर इस बात का अंदाज़ा बख़ूबी लगाया जा सकता है कि दिल्ली में, क्राइम के विकास की दर दिन दूनी रात चौगनी तरक्की कर रही है.......अब तक दिल्ली को क्राइम कैपिटल कहा जाता रहा है, लेकिन हाल ही के दिनों में जिस तरह से बलात्कार के मामले बढ़े हैं उसे देखते हुए दिल्ली को रेप कैपिटल कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा...ना केवल दिल्ली बल्कि पूरे एनसीआर में ये हालात हैं कि महिलाए ना सिर्फ रात में बल्कि दिन में भी घर से बाहर निकले से कतराती हैं....23 नवंबर को धौलाकुआ में मणिपुर की रहने वाली 30 साल की महिला के साथ किए गए सामूहिक बलात्कार ने, दिल्ली के क्राइम ग्राफ को एक इंच और बढ़ा दिया है। बताया जा रहा है कि महिला गुडगांव के कनवर्जिस कॉलसेंटर में काम करती थी और रात के करीब एक बजे कैब से घर लौट रही थी...कैब से उतरने के बाद वो घर से 100 मीटर की दूरी पर ही थी कि कार सवार चार बदमाशों ने हथियार के बल पर जबरन उसे गाडी में खीच लिया, जबकि इस बीच उसकी दूसरी महिला साथी भागने में क़ामयाब हो गई ....बदमाशों ने राजधानी की सड़कों पर बेख़ौफ उसकी इज्जत को तार तार किया और बेहोशी की हालत में उसे मंगोलपुरी इलाके में फेंक कर फ़रार हो गए...ये तो केवल बानगी भर है इससे पहले 9 अगस्त को दिल्ली के बसईदारा इलाके में भी 8वी कक्षा में पढ़ने वाली लड़की के साथ बलात्कार का मामला सामने आया था...मेडिकल जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि पिछले तीन महीने से लडकी का यौन शौषण हो रहा था, और उसे तीन महीने का गर्भ है.....गृहमंत्रालय के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 1917 से 2008 तक पूरे देश में बलात्कार के 3लाख 88 हज़ार सड़सठ मामले दर्ज किए गए वही 2005 से 2008 तक केवल दिल्ली में 19 सौ 28 मामले दर्ज किए जबकि मुबई 7 सौ 40 मामले दर्ज करारके दूसरे नबंर पर है। दिल्ली की बात करे तो यहां बलात्कार के मामले 14 से 18 साल की किशोरियों के साथ सबसे ज्यादा होतें है..इसके अलावा दस साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ भी सबसे ज्यादा रेप केस दिल्ली में ही होते हैं। केवल दिल्ली में ही 2008 में 61 बच्चियों को हवस का शिकार बनाया गया है....ये आंकड़े काफी है दिल्ली की संकुचित मानसिका को ज़ाहिर करने के लिए.....हालांकि दिल्ली पुलिस ने 23 नवंबर को, बीपीओ कर्मी महिला के साथ हुए बलात्कार की गंभीरता को देखते हुए, ये घोषणा की है कि अगर कोई महिला रात के वक़्त अकेले है और उसे घर पहुंचे के लिए वाहन ना मिले, तो वो बेझिझक 100 नंबर पर कॉल कर सकती है। पुलिस महिला को तुरंत कैब मुहैया कराएगी और उसे घर तक छोडेगी..इतना ही नही कैब में पुलिस का एक कर्मचारी भी होगा....अब सवाल ये उठता है कि पुलिस के इस क़दम से क्या वाकई महिलाओं के साथ होते हादसो में कमी आएगी..इतना ही नही क्या दिल्ली वालों की नज़रों में खाकी की धवि विश्वास करने लायक है...

वंदना त्यागी

Ph- 9313857794

दहेज हत्या बनी मौत का फरमान

दहेज हत्या बनी मौत का फरमान

पापा मैं छोटी से बड़ी हो गई क्यूं....तेरी इन बांहों में तेरी निगाहों में कुछ दिन और रहती तो क्या बिगड़ जाता....ये सवाल हर वो लडकी अपने मां बाप से पुछती है जो अपने पिता के आंगन को छोडकर ससुराल की गलियों में क़दम रखती है..आंखों में खूबसूरत सपने लेकर पिया के घर चली जाती है.....लेकिन उसके सपने उस वक्त चकनाचूर हो जाते है जब दहेज के लालची ससुराल वाले उसे दहेज की खातिर पल पल मौत को महसूस करवाते है....और मजबूरी के चलते कई बार महिलाएं धरेलू हिंसा को अपनी किस्मत समझकर उसे अपने गले लगा लेती है..ससुराल वालों के द्वारा दी गई जलालत भरी ज़िंदगी पल पल बेबस महिलओं को मौत का मंजर दिखाती है...लेकिन परिवार की इज्जत के खातिर अपनी जबान पर वो ताला लगाए...मासूम बिटियां हर रोज मरती रहती है, लेकिन मां बाप को दुख ना पहुंचे इस लिए सबकुछ सीने में दफन किए रहती है....और एक दिन राजकुमारी की तरह परवरिश करने वाले मां बाप को पता चलता है कि उनकी बेटी दहेज की बलि चढ़ गई है....आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 2006 में दहेज हत्या के 7618 मामले सामने आए वही 2007 में दहेज हत्या के मामले बढ़कर 8093 को गए इतना ही नही 2008 में ये आंकड़ा 8172 को छु गया....ये आंकड़ा अभी भी रफ्तार पकड़े हुए है...हर सेकेंड में एक महिला दहेज की बलि चढ़ रही है..महिला आयोग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 2005-06 में दहेज हत्या के 203 मामले सामने आए जबकि दहेज प्रताड़ना के 532 इतना ही नही 2006-07 मे 261 दहेज हत्या और 793 दहेज प्रताडना के मामले सामने आए। हालांकि महिलाओं के साथ दरिंदगी कर उन्हे मौत के घाट उतारने वालों के खिलाफ हमारे सविंधान में घारा 304बी के तहत कार्रवाई की जाती है। जिसमें आरोपी को 7 साल से लेकर उम्र कैद की सज़ा का प्रावधान है। लेकिन आए दिन दहेज हत्या के बढ़ते मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी कड़ा रूख अख्तियार कर लिया है......सुप्रीमकोर्ट ने साफ कर दिया है कि देश की सभी अदालते दहेज हत्या के मुकदमें में धारा 302जरूर लगाए। कोर्ट ने ये व्यवस्था इसलिए दी है ताकि दहेज हत्या के आरोपी को मौत की सजा सुनाई जा सके....सुप्रीम कोर्ट ने ये फरमान पंजाब के उस मामले के बाद दिया है जिसमें राजबीर नाम के एक युवक ने शादी के छ महीने बाद ही अपनी गर्भवती पत्नी की गला घोटकर हत्या कर दी। ट्रायल कोर्ट ने उसे 10 साल की सजा सुनाई ...लेकिन हाईकोर्ट ने इसे घटाकर 7 साल कर दिया।आरोपी राजबीर ने सज़ा माफ करने के लिए सुप्रीमकोर्ट में याचिका दी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसकी ये याचिका खारिज करते हुए राजबीर के आरोप को जधन्य करार दिया...सुप्रीम कोर्ट ने देहज हत्या को रोकने के लिए कानून में संशोधन कर धारा 304 बी के अलावा 302 लगाने के आदेश दिए है लेकिन देखने वाली बात ये है कि सुप्रीमकोर्ट के इस फरमान से दहेज हत्या पर कितनी रोक लग पाती है....लेकिन ये किसी ने नही छुपा है कि हमारे सविधान में जितनी सजा गुनाह करने के बाद दी जाती है उससे ज्यादा रास्ते गुनाह करके बच निकलने के है....इसलिए अगर जरूरत है तो सिर्फ सविधान में धारा परिवर्तन की नही बल्कि कानून बदलने की है।

वंदना त्यागी-9313857794


नुक्कड के मजनू

नुक्कड़ के मजनू......

भारत में कमी नहीं है मजनूओं की.......हर गली महोल्ले नुक्कड़ चौहराहों पर खड़े हुए मजनू बड़ी आसानी से मुहैया हो जाएंगे.....हम अगर अपने इतिहास पर नज़र डाले तो ना जाने कितने दिवानों के बारे में पढेंगे जिन्होंने अपने प्यार को पाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी....लेकिन जिस तरह से वक्त बदला है..समाज की सोच बदली है.....दिवानों ने भी अपना चोला बदल लिया है।....लैला.......मज़नू ने जहां एक दूसरे के लिए जान दी...शिरीह फरहाद भी एक दूसरे के लिए फना हो गए...इसी कड़ी में रोमियों और जुलियट भी थे। लेकिन आज के मजनू या कहों नुक्कड के मजनू रास्ते से गुज़रने वाली हर एक लैला पर मरमिटते है.. हर एक लैला के दिवाने है बैचारे ....लडकी बगल से गुजरी नही कि नुक्कड़ के मजनूओं का दिल जोरों से दहाडे मारकर धडकने लगता है.....दिल तो एक तरफ जबान भी काबू में नही रहती....इन मजनूओं को एक पल नही लगता ये कहने में....कि पलट हम भी तेरी राह में खड़े है दिल थाम कर.. लडकी अगले मोड से कट मारती है कि ये दिवाने फिर निकल पडते है दूसरी लैला की तलाश में.....उनकी ये मुराद मानों भगवान कुछ ही पल में सुन भी लेता है तो इनकी चांदी हो जाती है और दिल एक बार फिर रफ्तार पकड़ता है.....इस बार लैला के लिए कुछ नया सगुफा तैयार करके रखते है नुक्कड के मजनू...क्या पीस है यार...मानों वक्त के साथ साथ दिवानों नें प्यार के इजहार का तरीका ही बदल लिया हो....इन्हे हर लड़की में अपनी लैला नज़र आती....नुक्कड़ के अलावा मजनूओं की कतार बस स्टेंड रेलवे स्टेशन, शब्जी मंडी....इसके अलावा...स्कूल कॉलेजों में तो भरमार है .....मजनूओं की इस फौज को देखकर तो ऐसा लगता है कि लैलाओं के लिए भगवान ने मजनूओं की सैल लगा रखी हो....हर लड़की को देखकर आह भरने वाले इन दिवानों को शायद इस बात का अहसास हो गया है कि देश में जिस तरह से भ्रूण हत्या हो रही हैं उस हिसाब से तो इनके हिस्से की लैला दुनियां में आने से पहले ही इनसे अलविदा कह जाएगी इसलिए बेचारे बहती गंगा में हाथ धोते है, कि ना जाने कब कौन सी लैला इनके हाथ लग जाए.....इन नुक्कड़ के दिवानों के लिए हम तो बस यही कहेंगे.....दुनिया व्यस्त है अपनी दुनिया दारी में...बनिया व्यस्त है दुकानदारी में...लेकिन इन नुक्कड़ के दिवानों का क्या होगा...जिनका वक्त बीतता है लैलाओं की इंतजारी में....

वंदना त्यागी-9313857794

सेना में घोटालों की सेंध

घोटालों की जद में सेना भी

वो जब शरहदों पर प्रहरी की तरह अपनी ड्यूटी बजा रहें होते है तब जाकर देश चैन की नीद सोता है लेकिन जब से सेना ने सेवा भाव छोड़कर मेवा पाना की नीति अपना ली है तब से देश की नीद आंखों से दूर हो गई है। आखों से जहां नीद उड़ गई है वही, दिमाग़ सोचने पर मज़बूर हो गया है कि हमारे देश की सेना को क्या हो गया है..एक के बाद एक सेना में जैसे घोटालों का घुन लग गया है...पहले सुकना जमीन घोटाला.... जिसमें सेना के आलाआधिकारियों की वर्दी पर घोटालों के छीटें लगे। घोटाले में मिलिट्री सेक्रेटरी लेफ्टिनेंट जनरल अवधेश प्रकाश पर आरोप लगा कि सैन्य सचिव पद पर रहते हुए उन्होने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए एक निजी ठेकेदार को दार्जिलिंग के नज़दीक सुकना में 33 वीं कोर के मुख्यालय से सटी जमीन पर एजुकेशनल कॉम्प्लेक्स बनाने की इजाजत दिलवाई। इसके लिए नियमों की अनदेखी तो की गई साथ ही सुरक्षा से भी खिलवाड़ किया गया। सुत्रों की माने तो इस घोटाले में उनके तीन दूसरे सीनियर अफसरों की शामिल रहें. उनके सहयोगी रहे लेफ्टिनेंट जनरल पीके रथ को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया जिन्होंने सुकना जमीन घोटाले में अपने खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्यवाही शुरू किए जाने को चुनौती दी थी।
गौरतलब है कि दार्जिलिंग में 300 करोड़ रुपये से अधिक के जमीन घोटाले में पूर्व सैन्य सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अवधेश प्रकाश के साथ अपना नाम आने पर रथ कोर्ट मार्शल की कार्यवाही को चुनौती देने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट गए। घोटाले में हुई सेना की जांच में प्रकाश और रथ के अतिरिक्त लेफ्टिनेंट जनरल रमेश हलगली तथा मेजर जनरल पीसी सेन का नाम भी सामने आया। इतना ही सेना में कभी भर्ती घोटाला तो कभी खाद्य पर्दाथों को लेकर घोटालें सामने आना आम बात हो गई है। इन घोटालों में जो बात गौर करने वाली है वो यही है कि ज्यादातर घोटालों में सेना के अफसरों का हाथ सामने आया है इस तरह की हरक़तों से ना सिर्फ देश का बल्कि सेना के जवानों का मनोबल भी टूटता है। सुकना जमीन घोटालों के बाद जिसने राक्षस की तरह मुंह खोला वो था आदर्श हाऊसिंग घोटाला..इस घोटाले ने साफ बयां कर दिया कि किस तरह करगिल में शहीद हुए जवानो की शहदत को सेना के पूर्व आलाआधिकारी भूनाने में लगे है ....जिस सोसाइटी में शहीदों के परिवारों को फ्लैट अवंटन करने थे उसमें सेना के पूर्व अधिकारियों को जगह दे दी गई...इतना ही नही सोसाइटी को प्राइवेट बिल्डरों के हाथों में सौप दिया गया...सेना आज तक भी इस बात का पता नही लगा पाई कि सोसाइटी को बनाने के लिए एनओसी किसने दी....हालाकि अब थल सेना अध्यक्ष इस बात का भरौसा जता रहे है कि जल्द ही सिस्टम में सुधार किया जाएगा और ऐसे प्रवधान बनाए जाएंगे कि सेना कि जमीन पर किसी भी काम के लिए एनओसी अगर दी जाए तो उसके लिए रक्षा मंत्रालय की मंजूरी ली जाए सेना की कोई भी आलाअधिकारी

एनओसी पर हस्ताक्षर नही कर सकेगा। इतना ही नही अगर जरूरत पड़ी तो फाइल को मंत्रालय तक भेजा जाएगा। हालांकि आदर्श हाउसिंग मामले में कार्रवाई के नाम पर कुछ महाराष्ट्र के सूचना अयुक्त रामानंद तिवारी को सस्पेंड कर दिया गया है। ये तो महज़ कुछ मामले है जो मीडिया की सुर्खियों में छा गए और आम आदमी के बीच चर्चा का विषय बन गए...लेकिन सेना के अंदर जो दर्द एक सिपाही सहन कर रहा है उसके सामने ये घोटाले रत्ति भर है......अक्सर किसी भी घोटाले में छोटे ओहदे पर बैठे जवान का नाम कम ही आते है अगर आया भी हो तो मुझे याद नही लेकिन सेना में खुद को गोली मार कर मौत की नीद सोने वाले जवानों की सुर्खियां अक्सर अख़बारों में देखने को मिलती है। अपने परिवारों से दूर रहने वाले जवान अक्सर अपने अधिकारियों के दोगले व्यवहार से परेशान होकर मौत को गले लगाते है....लेकिन कभी सेना के आलाअधिकारी उन्हे अपने परिवार का हिस्सा नही समझते उनके दुख तकलीफ उन्हे नजर ही नही आते....आदर्श हाउसिंग घोटाले ने तो इस बात को पुखता भी कर दिया है..... आधिकारियों ने साफ कर दिया कि उन्हे शहीदों से ज्यादा खुद के लिए फ्लैटों की जरूरत ज्यादा है। कुछ दिनों पहले कि बात है आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाले के शोले दहक ही रहे थे कि इसी बीच जालंधर के मिलिट्री हॉस्पिटल में अफसरों की मिलीभगत से करोड़ो रूपए की दवाईंयों की हेराफेरी का मामला सामने आया । ये वाकई शर्म की बात है कि जिस देश में सेना को सबसे ऊंचा दर्जा दिया गया है उसे सेना के अफसर इतनी नीचे हरकत कर सकते है । सुत्रों की माने तो पश्चिमी कमान के जालंधर स्थित मिलिट्री अस्पताल में करोड़ों रुपए की दवा खरीद में जो हेराफेरी हुई है उसमें अस्पताल के आलाअधिकारियों से ही पुछताछ हो रही है। लेकिन अफसोस की बात तो ये है कि इसी अस्पताल के कमांडेट रहे बिग्रेडियर रैंक के अफसर को 10 करोड़ रूपए के घोटाले में सज़ा पाए अभी एक साल भी नही हुआ कि ये दूसरा घोटाला बेपर्दा हो गया । ऐसा बताया जा रहा है कि इस खेल में निचली रैंक और आलाधिकारियों की मिलीभगत , अपने चहेते डिलरों को ही लाखों रूपए का कोटेशन देते थे।इतना ही नही ताक पर रखकर कुछ डिलरों का रजिस्ट्रेशन किया गया , जिनके पास लाइसेंस तक नही थे....आए दिन सरकार में जिस तरह घोटाले सामने आ रहे हे उसी दौड़ में सेना भी शामिल हो गई है।हालातों को देखकर तो बस यही कहा जा सकता है कि सरकार ने जहां भ्रष्ट्राचार की पट्टी आंखों पर बांध ली है वहीं भारतीय सेना ,शेर पर सवा शेर बनकर घोटालों की चादर ओढ़ना चाहती है।

Saturday, February 20, 2010

देश की असली तस्वीर

इंडिया तरक्की कर रहा हैं .....लेकिन ये तस्वीर काफी हैं भारत की सचाई बताने के लिए.... भले ही हम तरक्की के नए मुकाम हासिल कर रहे हो लेकिन ....कडवी सचाई ये हैं की आज भी हमारे देश में गरीबी का बोल बाला हैं......गरीबी हर घर में राज कर रही हैं....जहाँ में एक सवाल कौध रहा होगा की कैसे ......हर रोज़ घरों में कामकरते मासूम बच्चे क्या गरीबी का गुलाम नहीं है.....सडकों पर कबाड़ा बीनते बच्चे क्या गरीबी की गुलामी नही कर रहे है.....कभी गौर से देखा है सड़को पर भीख मांगते बच्चे.....कैसे रेड लाइट पर दौड़ दौड कर भीख मांगते है......हर गाड़ी के पास जाते वक्त उन्हे एक उम्मीद होती है कि गाडी का शीशा उतरेगा और कोई नौजवान या फिर मेम सहाब उसके हाथ में एक या दो रूपए थमा देगी,,,,,,लेकिन मिलता क्या है ......झिडकी.....वो भी कुछ इस अंदाज में--- अबे खुले पैसे नही है .....सडकों पर कचरा बीनकर गुजरा करने वाले होटलों में कप साफ करने वाले मासूम बच्चे गरीबी की गुलामी ही तो कर रहे है......लेकिन इन्हे गुलाम बनाने वाले कोई और नही हमारे देश के वो लोग है जो अपने आप को भारत का मसीहा समझते हैं....आज तक कोई भी हमारे देश के मर्ज को नही समझ पाया कि गरीबी बाल मज़दूरी की जड़ है .....या बाल मजदूरी देश के लिए एक अलग बिमारी है...... हक़ीकत तो ये है कि गरीबी ही बाल मजदूरी की एक बड़ी समस्या है....... गरीबी के चलते ही छोटे छोटे मासूम बच्चे बाल मजदूरी करने के लिए मज़बूर होते है अगर ऐसा नही करेंगे तो खाना कहा से खाएंगे......फिर चोरी करेंगे औऱ जेल जाएंगे......सरकार बाल मंजदूरी पर कानून बनाती है कहती है बाल मजदूरी ग़ैर कानूनी है-----लेकिन अगर ये बच्चे अपना पेट नही भरेंगे तो इनका गुजारा कैसे होगा ......सरकार बाल मजदूरी पर रोक की बात तो करती है लेकिन बच्चों के उथ्थान के लिए कोई कदम तो उठाए.....

वंदना त्यागी
चैनल वन

Saturday, January 9, 2010

महंगाई


कमर तोडती महंगाई ने आम आदमी से लेकर खास सभी का जीना मुहाल कर दिया हैं ...ऐसे में डेल्ही की मुख्य मंत्री का बयान की आने वाले कई महीनो तक ना तो चीनी के दाम कम होंगे और ना ही डेल्ही की सडको पर दोड़ते वाहनों पर संख्या पर....... ऐसे में दिल्ली में रहने वाले लोगों के लिए बुरी खबर हो सकती हैं...... इसे सरकार की नाकामी कहा जायेगा या दिल्ली में चीनी की कमी .... लेकिन देखा जाय तो ना सिर्फ चीनी बल्कि खाने पीने की तमाम चीजे इतनी महंगी हो चुकी हैं की बजट में समाना न मुमकिन हो गया हैं ..... यहाँ सवाल ये उठता हैं की गरीब आदमी करे तो क्या करे

vandana

Friday, December 11, 2009

मेरे देश की तश्वीर तुझे क्या हो गया हैं ......क्या करे देश सारा कांग्रेस में हो गया हैं..... क्या करे भीख मांगकर होता तो हैं गुजरा..... नोकरी पेशा लोगों का तो गुजारा ही मुहाल हो गया है मेरे देश की तश्वीर तुझे क्या हो गया हैं।

Wednesday, December 2, 2009

शादी के मेरी लाइफ का बदलाव

मेरी love marriage हुई थी॥ हम दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे । जब हम बी स सी सेकंड इयर में थे तब विनीत जो मेरे हसबैंड बन गये हैं उनका आर्मी में नमब़र आ गया वो आपनी ट्रेनिंग पर चले गये ....करीब सात साल बात मार्च १२ ,२००९ को हमारी शादी हो गई ...... में अपने पति से खुश हूँ.... कुछ महीनो बाद में माँ भी बन जाउंगी ..... लेकिन न जाने दिल के किसी कोने में आपने माँ पापा का प्यार विनीत के प्यार पर भरी पड़ता दीखता हैं... एक वक्त था जब में विनीत से जयादा किसी से भी प्यार नही करती थी .लेकिन जब से पापा ने मेरी शादी खुशी खुशी विनीत से कर दी तब से मेरे दिल में पापा की जगह और जायदा बन गयी हैं........ अब जब में अकेली हूति हूँ तो मुझे विनीत का प्यार याद नही आता बल्कि पापा को वो दुलार याद आता हैं जो उन्होंने मुझे दिया... मेरा मन पापा माँ से मिलने का करता रहता हैं लेकिन वहा जाने के लिए भी विनीत से पर पूछना तो पड़ता ही हैं.....विनीत मना तो नही करता लेकिन मुझे ऐसा लगता हैं की वो दिल से ये चाहता हैं की में ससुराल जाऊँ..... लेकिन मेरा मन वहां जाने का नही करता हैं..... मुझे नही पता क्यो, लेकिन में आपनी पुराणी जिन्दगी में लोटना जरुर चाहती हूँ ...लेकिन अब से सम्भव नही हैं

वंदना के दिल का दर्द

Monday, November 2, 2009

कई बार जिन्दगी हमे कितना उदाश कर देती है हम आपनो से ही कितने खफा हो जाते है । वो आपने जिनके बारे में हम सोचते हैं की वो हमारे सबसे करीब है और उनकी जगह हमारी लाइफ में कोई नही ले सकता । बावजूद इसके न चाहते हुए भी आपनो से दर्द आसानी से मिल जाता है । हालाकि लोग आपना ब्लॉग न जाने क्या सोच कर बनते होंगे लेकिन मेरी कलम जब भी उठती है वो या तो ऑफिस में स्क्रिप्ट के लिए या जब में दुखी होती हूँ तो आपने दर्द को बायाँ करने के लिए --------कहते हैं की पति पत्नी का रिश्ता विश्वास और प्यार पर टिका होता हैं । लेकिन कई बार प्यार और विश्वाश भी रखा रह जाता हैं

Saturday, July 18, 2009

मेरी लव स्टोरी का अगला हिस्सा

अब से पहले मेने लिखा था की मेरे सपने में फिर एक लड़का आए। ये लड़का वही था जिसने मेरे बैग में लैटर रखा था। में सोचने लगी सपने में तो उसी लड़के ने बैग में लैटर रखा जो क्लास में दिखा कही सच में भी उसी ने ही तो ये लैटर नही रखा हैं। ख़ैर कशमकश का ये सिलसिला कुछ दिनों तक चलता रहा। वो लड़का कोनहैं ये जान ने की तड़फ दिन बे दिन बढ़ने लगी। वो मेरे पीछे बैठकर कुछ्ना कुछ बोलता और मुझे लगता ये आवाज जानी पहचानी क्यो लगती है में ये सोचकर ही रह जाती .आखिर में वो दिन आ ही गया जब मेरा आमना सामना उस अजनबी से हो ही गया। वो आपने दोस्त से बातें कर रहा था । और में उसके सामने से गुजर गयी मेने देखा ये वही लड़का हैं जोआवाज मुझे जानी पहचानी लगती थी। मेने जब उसे पहली बार गौर से देखा तो मुझे भी लगा जैसे मेने उसे पहले भी देखा हैं । सरे इंसिडेंट के बारे में सोचकर मुझे लगा की हमारा कोई पुराना रिश्ता हैं और भगवान् हमे मिलाना चाहता हैं। बस यही से में उसे सीरियसली लेने लगी । में उसकी हर बात पर धयान रखने लगी । वो जो कुछ भी बोलता मेरे लिए प्यार भरी छेड़खानी होती। मेरा शक यकीन में बदलने लगा । मुझे लगने लगा की वो मुझे प्यार करता हैं। में भी उसे चोरी चोरी देखती थी और वो भी लेकिन दोनों के दिल में क्या चल रहा था । ये दोनों में से कोई नही जनता था। आगे फ़िर कभी --------------------------

Tuesday, June 2, 2009

कई दिनों तक ये सिलसिला चलता रहा और एक दिन .मेरे सपने में एक लड़का आया। वो लड़का मुझे प्यार कर रहा था । अगले ही दिन वो ही लड़का मुझे आपनी क्लास में दिखा। में हेरान थी की इस लड़के को जब में जानती नही तो मुझे इसका सपना कैसे आया। धीरे धीरे एक दिन न्यू इयर आ गया। में और मेरी फ्रेंड बहार खडे हुए थे । क्लास का टाइम जैसे ही हुआ हम अन्दर चले गये। मेने जैसे ही आपना बैग बुक निकलने के लिए खोला उस में से एक लव लेटर निकला जिस पर लिखा था हैप्पी न्यू इयर एंड इ लवयू । में देख कर घबरा गयी । लेकिन सोचने लगी की कोन हो सकता है। फिर एक दिन मुझे फिर सपना आया और इस बार मेरे सपने ----------------

Wednesday, May 13, 2009

माय

एक एहसास तेरा हर वक्त मेरे साथ रहता है न जाने वो इस बात से क्या बेखबर रहता हैं वो क्यो छुपता है प्यार को आपने प्यार तो उसका उसकी बातो में नज़र आता है । पहचान तो गये हैं हम भी प्यार को उसके लेकिन इज़हार करना तो नही आता हैं । दूर दूर रहते है फिर भी लेकिन दिल का दिल से रिश्ता बनता जाता है। ये जानते हम भी और वो भी के प्यार तो आँखों से बयाँ हो जाता है।
वंदना त्यागी की कलम से नॉएडा

my love story

पहली बार मेरी और उनकी मुलाकात कॉलेज में हुई थी। मुलाकात तो सिर्फ़ में इस वक्त बोल रही हूँ लेकिन जब हम दोनों एक साथ पढ़ते थे उस वक्त नजारा ही कुछ और था । बात हैं साल २००२ की जब में पहली बार आपने गाँव से निकलकर एक कसबे में पढने के लिए गयी थी । दरअसल मेरे पापा मेरे सारे काम खुद ही कर देते थे जैसे कॉलेज से फोम लाना उसे सबमिट करना। कुछ ऐसा ही उस दोरान हुआ था। मेरे पापा ने मेरे दाखिला बीएस ई में करा दिया। में कॉलेज जाने लगी । लेकिन मेरे पीछे जो भी कोई बैठता था उसकी आवाज मुझे जानी पहचानी लगती थी । वो कोन था में ये जानना चाहती थी ।

my life

hello im vandan tyagi- mein aapne baare me jaayda to nahi janti but itna jarur janti hoon. ki me bhut bhawuk kishm ki ladki hoon. kafi din pahle meine socha tha ki me aapni love life par ek kitab likhungi likin mujhe waqt nahi mil raha tha lekin me aaj us kahani ki suruwat karne ki soch rahi hoon.